तुम डरते हो किस बात से।
[ 1 ] किसी अनजान के हाथ से या अपनों के साथ से घनी अंधेरी रात से या पहर की शुरुआत से तुम डरते हो किस बात से। कोई पुरानी बात से या किसी की फटकार से अपनों की उम्मीदों से या दूसरों की तरकीबों से तुम डरते हो किस बात से। बिछड़ते घर के साये से या बदलते घर के हालात से कंधों पर बढ़ते बोझ से या मानवता की सोच से तुम डरते हो किस बात से। दोस्तों के छूटते साथ से या निकलना अपने आप से दुनिया की सोच से या रिश्तेदारों के ज्ञान से तुम डरते हो किस बात से। [ 2 ] चाहे जानना नई बात हो या करना कोई शुरुआत हो पढ़नी कोई किताब हो या करनी कोई खुराफात हो सब करना तुमको ही होगा बस इतना तुमको याद हो तो फिर डरने की क्या बात हो। बढ़ते डर का शोर हो या पीछे मुड़ने पर जोर हो शारीरिक कोई खोट हो या दिमाग पर चोट हो रुकना नही है अब तुमको, ये जज़्बा गर साथ हो तो फिर डरने की क्या बात हो। छूटता किसी का साथ हो या डगमगाता विश्वास हो बैचेनी की कोई बा...