कुल्हड़ वाली चाय
मिट्टी की खुशबू संग कुल्हड़ वाली चाय,
देश और दिवानगी जो दोनों बताए।
सांवले रंग से मुझे मोहब्बत है, जी जनाब खूब
पहचाना मैं चाय का शौकीन हूं। चाय ये एक ऐसा नशा है, कि एक बार अगर लत लग गई तो छोड़ना मुश्किल
है। आप शराब का नशा छोड़ सकते हैं, लेकिन चाय का नहीं। अपने
समय पर अगर चाय नही मिली तो सर दर्द, आंखों में नींद और सब कुछ खाली-खाली सा लगने लगता है।
चाय का नशा सबसे बेहतरीन नशा है, जिसे आप शुकून से किसी अपने के साथ बातचीत करते
हुए दो घूंट पी सकते हैं। और भारत देश में इस नशे के सबसे शौकीन लोग हैं। यहां तो
अगर आप किसी को चाय न पूछें तो ये विषय गंभीर हो जाता है। चाय पीना और पिलाना यहां
कि एक परमंपरा बनी हुई है। बड़े से बड़े फैसले यहाँ चाय पीते पीते ले लिए जाते हैं। जॉब की
बात हो या शादी की, लड़ाई हो किसी से या नया-नया प्यार सारी चीजें एक चाय की चुस्की पर हल हो जाती हैं। अगर कई दिनों के बाद किसी दोस्त से मिलना हो तो चाय की टपरी पर मुलाकात को यादगार बनाते हैं। जी यकीन मानिए इस चाय ने कई लोगों का भला भी किया है, आप हमारे देश के प्रधानमंत्री
को ही देख लिजिए। यहाँ लोग देश के बड़े-बड़े मुद्दों पर चर्चा सबसे अधिक चाय की टपरी पर कर लेते हैं। यहां आपको चाय पर चर्चा करते हुए लोग हर मोड़, गली और चौराहों पर मिल ही जाएंगे। क्योंकि
यहां चाय का कोई समय नहीं होता, 24X7 चाय पी और पिलाई जाती है। चलिए आज
चाय पर इतना ही बाकि फिर कभी.....
कैफ़े के इस दौर में मुझे टपरी वाली चाय भाए,
वो सौंधी-सौधीं खुशबू, वो कुल्हड़ वाली चाय।
- Adarsh Singh
Wahhh
ReplyDeleteshukriya
Deleteसाँवले रंग ने तो पूरे देश को दीवाना बना रखा है ।
ReplyDeleteप्रशंसा करने के लिए शब्द नहीं हैं हमारे पास, वैसे तो बहुत ही अदभुत,अनुपम,अद्वितीय,विलक्षण व यथार्थपूर्ण लेख हैं। ❣
ReplyDeleteबहुत-बहुत शुक्रिया
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