कोरोना में भूख की मार झेलते मजबूर "मजदूर"

शहर में मजदूर जैसा दर-ब-दर कोई नहीं,
जिसने सबके घर बनाये उसका घर कोई नही।

जहाँ पूरा देश इस कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा हैं, वहीं दूसरी और देश के मजदूर को कोरोना के साथ-साथ कई और चीजों से लड़ना पड़ रहा है। जहाँ हम सभी घरों में रहकर #stayhome के साथ सेल्फी पोस्ट कर रहें हैं, वहीं गरीब मजदूर के पास न छत है, न पहनने को कपड़ा, और न ही पेट भर खाना। बच्चों के लिए खाना जुटाते-जुटाते अपनी भूख ही भूल चुके हैं ऐसे मजबूर "मजदूर"। खाना खरीदकर खाएं भी तो कैसे तीन सौ रुपये दिहाड़ी कमाकर घर का खर्च चलाने वाले मजदूर के पास बचत के नाम पर बचती है तो सिर्फ "कमाने की उम्मीद"। बीते 2 महीने में जैसे-तैसे हिम्मत रखकर दिन काटते मजदूर अब पेट काटकर गुजारा करने को मजबूर हो गए हैं।
हालांकि देश की जनता और सरकार सारे प्रयास कर रही है कि कोई भूखा न सोये लेकिन फिर भी हर एक तक मदद पहुंच नहीं पा रही है। जब मजदूरों की ऐसे हालातों में तस्वीरें आती हैं जहाँ बच्चें भूख से बिलख रहें हैं, गालों पर आंसू सूखकर जैसे किसी कष्ट का चिन्ह बन गए हों। इन तस्वीरों से हम आपको सिर्फ कुछ वक्त के लिए पीड़ा होगी, लेकिन उस पिता के ऊपर क्या गुजर रही होगी जो बच्चों के लिए शहर कमाने निकला था।

हजारों किलोमीटर पैदल चलने के बाद कोई घर पहुँचा तो कोई ईश्वर के पास। उनकी आंखों में कोरोना का डर नहीं बल्कि भूख से बेबस और पैदल चलकर जान गवाने का डर दिखता है। हर व्यक्ति को संवेदनशील होना चाहिए अगर आप किसी की मदद कर सकते हैं तो अवश्य करें, अब इंसानियत ही सभी को बचा पाएगी।

- Adarsh Singh


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