इंटरनेट के तारों में फंसे लोग

         "इंटरनेट के तारों में फंसे लोग"

अत्यधिक आधुनिक बनते-बनते हमने इंटरनेट के तारों की तरह खुदको भी उलझा लिया है। इंटरनेट की परत दिन-ब-दिन हमारे ऊपर पड़ती जा रही हैं और हम उसके प्रति और अधिक आकर्षित होते जा रहें हैं। सोशल मीडिया पर सबसे तेज बनने के लिए लाखों लोगों द्वारा मचाई गई चका-चौंध में हर किसी को आगे निकलना है। लोग क्या खा रहें हैं, क्या पहन रहें हैं, और कहां घूमना पसंद करते हैं, ये सब सिर्फ किसी भी व्यक्ति की प्रोफाइल देखकर समझा जा सकता है। 

ट्रेंड्स को फॉलो करते करते लोगों ने अपनी प्राइवेसी कब पब्लिक कर दी जैसे उन्हें पता ही ना चला हो। अपने निजी जीवन की हर एक जानकारी अपने प्रोफाइल पर अपलोड करने के बाद लोग खुदको कूल समझते हैं। कई लोग इंटरनेट का प्रयोग सिर्फ समय गुजारने में करते हैं और कुछ लोग सरकार को गालियां देने में। इसके बाद कुछ इंटेक्चुअल लोग बचते हैं, जो इंटरनेट पर भरपूर ज्ञान देते हैं। 

आपको शायद इस बात की भनक तक नही है कि, आपके द्वारा दी गई मामूली सी जानकारी डाटा बनकर करोड़ों में बेची जा रही है। सोशल मीडिया पर ट्रेंड्स बनते हैं, प्रोपेगेंडा सेट होते हैं, मार्केट स्ट्रैटजी बनती है। इसके साथ ही सोशल मीडिया से अंदाजा लगाया जाता है कि, इसबार सरकार किसकी बनेगी। 

इंटरनेट का इस्तेमाल बिल्कुल भी गलत नहीं है, बल्कि यह तो हमारे लिए काफी उपयोगी है। लेकिन जिस तरह हर एक के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल मामूली हो गया है, और लोग अपने मनमुताबिक कुछ भी पोस्ट कर रहें हैं, बिना ये सोचे की उनकी एक पोस्ट से क्या प्रभाव पड़ने वाला है। जिसके चलते इंटरनेट हमारे लिए धीरे-धीरे घातक साबित हो रहा है। ज़माना ऐसा आ गया है कि, लोग अगर किसी मजबूर की मदद भी करते हैं तो पहले एक सेल्फी या वीडियो लेते हैं। किसी के साथ कोई हादसा हो जाता है तो उसकी मदद करने के बजाय उसकी फोटो/वीडियो निकालते हैं। फिर उस वीडियो पर लोग अपनी समझ के हिसाब से कमेंट करना शुरू करते हैं। कुछ महान लोग अपशब्द का भी प्रयोग धड़ल्ले से करते हैं, और कुछ हँसी मजाक करने से भी नही चूकते। 

क्या इंटरनेट पर हो रही दौड़ में आगे निकलने की ख्वाहिश में हमारे अंदर की इंसानियत समाप्त हो रही है? और अगर ऐसा है तो आपको एक गहरे चिंतन की आवश्यकता है। हर सुविधा का लाभ बस जरूरत भर ही लेना चाहिए, लेकिन लोगों का कंट्रोल उनके मस्तिष्क पर भला कहां होता है, इसलिए इंटरनेट पर अपनी खुशी ढूंढते-ढूंढते उसी में उलझ कर रह गए।

इंटरनेट में कोई बुराई नहीं है, वह तो बस हमारे कार्यों को आसान बनाता है। उसकी मदद से बड़े-बड़े काम चुटकियों में हल हो जाते हैं। मगर सवाल उठता है इसका इस्तेमाल करने वालों पर, जो बिना रुके उंगलियों को धड़ा-धड़ अपनी स्क्रीन पर दौड़ा रहें हैं। उन्हें लोगों को इग्नोर करने के लिए और नए लोगों से जुड़ने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता समझ आता है, इंटरनेट। अब इंटरनेट का एक्सेस हर एक के पास है तो इसके इस्तेमाल के लिए इतना सोचना भी नहीं पड़ता। आपके लिए क्या गलत है, क्या सही है ये आपको ही सोचना पड़ेगा। फिलहाल 2 GB डाटा पर-डे मिल ही रहा है, करते रहिए मजे के साथ खर्च। 

एक लाइन में बात खत्म करते हैं - Its time to turn up.

- Adarsh Singh





Comments

  1. आज इंटरनेट का सही इस्तमाल हुआ भाई का पोस्ट देखने को मिला, बहुत उम्दा भाई

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  2. यथार्थपूर्ण लेख❣

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  3. बहुत सही...👌🏻

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  4. जोरदार...����

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